सफ़र

मुश्किल है बताना कैसे गुज़र रहा है सफ़र, कुछ का बहुत मुश्किल कुछ का जैसे रहगुज़र…. सफ़र सिर्फ उचाइयों को पाने वाला नही एक normal सी ज़िंदगी बिताना भी… कुछ परेशान हैं की आँगे क्या होगा कुछ खुश है की बेहतर है वक़्त तो मिला साथ रहने का… बच्चे शुरुआत में बड़े खुश नज़र आते थे की अच्छा है अब स्कूल नही जाना होगा अब परेशान है कब अपने दोस्तों से मिलेंगे…… शुरू के कुछ महीनों बेइंतेहा अलग अलग रेसिपि सीखी अब फिर वही गली का समोसा खाने की इच्छा रखते है… जी चाहता है फिर बिना मास्क के उन परिंदो की तरह भागें जैसे पहले बिना किसी बंदिश के की क्या सेनिटाइजर क्या मास्क …. बस यारों का साथ और अपने मन का उल्लास लिए चल पड़ते थे दोस्तों के साथ…. आज का सफ़र इतना ही कल लिखती हू आंगे आज के लिये अलविदा 😇

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